Sunday, 30 June 2013

इससे क्या होता है?

इससे क्या होता है?

हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में जब हम व्यस्त रहते है . अपनी सफलता को पाने के लिये कोशिशें करते रहते हैं .सभी अपने अपने कामों में व्यस्त हैं तब क्या आपको ये याद है कि आप इस राष्ट्र की सबसे छोटी इकाई है शायद कई लोग यही भूल जाते है ओर इसका सबसे बड़ा लक्षण होता है कि उनके मुँह से आप अक्सर सुन सकते है इससे क्या होता है? या उनके काम करने में ये भाव देख सकते हैं .क्या आपको पता है कि आपकी छोटी छोटी सी आदते इस देश को प्रभावित करती हैं . चलिए आज चलते हैं आईने के सामने तो हकीकत खुद ही सामने आ जाएगी.
कभी कभी रास्ते में चलते चलते कुछ खाकर पैकेट्स फेंक देने की आदत ओर वही सोचना इससे देश को क्या होगा? आज हमारे देश में पोलीथिन का कचरा एक बड़ी समस्या बन चुका है.किसी सरकारी बाबू की कॉमन आदत ऑफिस के कोने में थूकना, कुछ लोगों की घर से कूड़ा बाहर फेंकने की आदत उससे देश को क्या नुकसान हो सकता है? सोचकर देखिये क्या यही वजहें नहीं कि हमारी सरकार  को सफाई के लिये हर साल कितना धन खर्च करना पड़ता है .आगे बढ़ते हैं हमारी दूसरी आदतों की ओर अपने घर में लड़कों को लडकियों से ज्यादा महत्व देना . उन्हें ये अहसास कराना कि वो कमजोर हैं और कितनी ही बार सिर्फ ये कहकर सजा देना कि वो एक लड़की है क्या यही वजह नहीं है कि लड़कियों ने अत्याचारों को सहते रहना ही अपना भाग्य समझ लिया और अत्याचारों को चुपचाप सहना सीख लिया क्या यही वजह नहीं कि आज अत्याचार इतना बढ़ गया? जाति धर्म का भेदभाव जो आपने दिखावे के लिये तो बिलकुल खत्म कर दिया पर क्या आज भी ये भेदभाव दिल से मिटा है ? क्यों आज भी शादी के समय सच्चा प्यार सिर्फ जाति पाति की बेड़ियों में जकड़कर दम तोड़ देता है ?  क्यों आज भी आप व्यक्ति का सरनेम पूछना जरुरी समझते है ओर सरनेम पूछने के बाद कई लोगों का तो व्यवहार ही बदल जाता है . एक और बात अपनी ही दुनिया में व्यस्त रहने वाले हम , मासूम बच्चों के बचपन को छीन कर उनके वजन से जयादा भारी बस्ता थमाकर , बस ज्यादा मार्क्स लाने को ही उसकी सफलता बताकर और समर वैकेशन में भी हम उन्हें ऐसे कोई खास पल नहीं देते  जैसे हमने कभी बिताये थे जिन्हें याद करके वो भी भविष्य में खुश हो सकें. क्या यही अकेलापन यही वो कारण नहीं जिसके आज बच्चों की मासूमियत कहीं खो गयी उन्होंने मार्क्स को ही जीने कि वजह समझ लिया .अकेलेपन ओर डिप्रेशन से तंग आकर मौत को अपनाने लगे . क्या हुआ ? आईने से दूर जाना चाहते हैं ? कितना भी दूर जाएँ दूर जाने से प्रतिबिम्ब और बड़ा ही होगा . कमरे से निकलते समय लाइट को जलते रहने देने की आदत , घर में बहते पानी , कभी कभी बिना वजह ही पेट्रोल को वेस्ट करना . हमने पेट्रोल , पानी , बिजली ये सब अपनी खरीदी हुई समझकर वेस्ट करने की आदत डाल ली है . कहीं ऐसा ना हो भविष्य में कितनी देकर भी कीमत इन सुविधाओं को ना पा सके . एक बड़ी समस्या भ्रष्टाचार हमारी कुछ छोटी आदतों का ही तो परिणाम है क्यों हमे आसानी लगती है सुविधाओं को ब्लैक में लेने में , टिकेट को दलालों से लेने में , डोनेशन देके एडमिशन लेने में . सरकारी दफ्तर में पैसा देकर काम कारवाने को क्यों हम अलिखित कानून कि तरह पालन करने लगे हैं ? क्या यही वजह नहीं है कि आज भ्रष्टाचार राष्ट्र के विकास की राह में चट्टान बनकर खड़ा है . यह आत्म निरीक्षण ही हर समस्या का समाधान बन सकता है क्योंकि आत्म सुधार ही राष्ट्र सुधार का पहला कदम है . तो इस पहले कदम को उठिए ओर हां ये आइना अपने साथ ले जाइये ये आपको बतायेगा कि इससे क्या होता है ?


Tuesday, 25 June 2013

कमजोर और मजबूत हाँथ का ये रिश्ता 

           कांधे पर जिम्मेदारियों का बोझ लेकर ,
           उनका एहसास भी ना होने दिया हमें .
           बेटा हो या बेटी कभी बोझ ना होने दिया उन्हें ,
           दिनभर के बाद जिन्हें थकान नहीं सुकुन मिलता है.
           फर्ज पूरा होने क अहसास उन्हें हरपल खुश रखता है,
           संस्कारों और आदर्शों को हमने आपसे सीखा है.
           अंगुली पकड़कर आपकी देखा है सारा जहाँ ,
           तो काँधे पर कभी बैठकर सर आसमान देखा है
           खुदा को ढूँढा नहीं जहाँ में उसे तो बस आप में देखा है ।।

      ये पंक्तियाँ हम डेडिकेट करते हैं उन्हें जिनके होने की वजह से हमें इस संसार कि कड़ी धूप में भी छाया का एहसास रहता है .जिन्हें दिनभर की थकान के बाद इतने सारे काम करने के बावजूद उन्हें कम ही थकान होती है . उससे ज्यादा होता है सुकून , अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का सुकून . जो कभी शिकायत नहीँ करते अपने लिए , उनकी जरूरतें बहुत ही सीमित है हमारी हर जरूरत , खुशी और हमारी हर परेशानियों  को जो अपना बना लेते है उन्होंने . क्यों ऐसे ही है ना आपके पापा भी या जो भीं आप उन्हें प्यार से बोलते है ?  हर एक बच्चे के लिये उसके सुपर हीरो हर एक बच्चे के लिये  उसका गर्व , उसका आदशॅ.
जी हाँ , अपको  आपको बच्चा बोल दिया मैंने क्यूंकि  आप कितने भी बड़े हो जायें उनके लिये तो बच्चे ही हैं . क्यों ऐसा ही कहते हैं न आपके डैडी ? तभी तो  बच्चा समझकर हर गलती पर डांट देते हैं ओर माफ़ भी कर देते है अपकी हर भूल को . जहां मां के पास हमें मां का प्यार , सुकून,  आराम ओर ना जाने कितना कुछ मिलता है वहीं पिता के होने से हमें सुरक्षा का एहसास ,  संस्कारों ओर आदर्शों क जीता जागता ज्ञान मिलता है और मिलती है प्रेरणा बिना शिकायत करे अपने कतॅव्यों को निभाने की . मुझे पता है इसके अलावा भी बहुत कुछ है जो हमें उन्होंने दिया है मैनें बस उतना लिखा जितना शब्दों में बयां हो सका शब्द ही नहीं मिले इसलिए माफ कीजिएगा .
याद है आपको? उनकी अंगुली पकड़कर चलते चलते जैसे हमने सारा जहां देख लिया ओर कभी कंधे पर बैठ  कर पूरा आसमान अपने करीब पाया. कभी गिरने लगे तो उनहोंने ही संभाला था जब आपने साइकिल चलाना सीखा था तो वो ही थे जिन्होने  सिखाते सिखाते आपको उसे अकेले चलाने का हौसला दिया था . इसी तरह हम जब भी टूटने लगते हैं तो उनकी डांट से भरी सीख हमें फिर खड़ा कर देती है ओर उनके होने से हमें लगता है कि कोई है जो गिरने पर भी हमारे साथ होगा. तो कहां खो गये आप ?
रहने दीजिये बहुत तोहफे दिये हैं उन्होने हमें आप याद करने बैठेंगे तो ऐसा न हो ये दिन यूँ ही गुज़र जाये . क्योंकि ये दिन बहुत खास हो सकता है और आपके पिताजी के लिए अगर इस फादसॅ डे भी उन्हें सिर्फ विश करके और एक गिफ्ट देकर ही मनाया है आपने . आपको नहीं लगत कि कुछ कमी रह गयी , आपको थोड़ा ज्यादा करना चाहिए .अभी भी देर नहीं हुई आप कोइ भी दिन उनके लिये बहुत खास बना सकते हैं क्योंकि आप कितना भी ज्यादा कर लें वो थोड़ा ही होगा तो हम आपकी थोड़ी हेल्प कर देते हैं .
                अभी जब आप ये आटिॅकल पढ़ रहें हैं और आपके बापू आपके आसपास है शायद वो बगल के कमरे में आपसे कुछ नाराज बैठें हों, सामने बैठे हों ये भी हो सकता है कि वो आपको डांट रहें हों. इससे पहले कि वो कहीं चले जायें और ये दिन एैसे ही निकल जाये आप उन्हें बताइये कि कितने खास और जरूरी हैं वो आपके लिऐ . उनसे माफी मांगिऐ हर उस बार के लिऐ जब आपने उनकी दवा जैसी कड़वी डांट के पीछे छुपी अपनी भलाई को नहीं समझा . उन्हें बताइये कि आपने उनके प्रोफेशन को तो नहीं अपनाया लेकिन आप उनकी सीख संस्कार और आदॅशों को कभी नहीं भूलेंगे . उन्हें ये भी एहसास दिलाइये कि जैसे बचपन से आज़ तक उन्होंने आपको संभाला है वैसे ही बूढ़े और कमजोर हो जाने पर आप उनके साथ होंगे . एक कमजोर और दूसरे मजबूत हांथ का ये रिश्ता जो बचपन में उन्होंने बनाया था वो रिश्ता आप बनाये रखेंगे . उन्हें ये एहसास दिलाना बहुत जरूरी है कि वो आपकी एक अहम जरूरत हैं और वो जगह जो आपने उन्हें दी है वो बस उन्हीं की है,  उन्हीं के लिए है और उन्हीं की ही रहेगी और भी जितना जो कुछ है आपके मन में उनके लिये आज कह दीजिये उनसे क्योंकि कभी कभी कहना जरूरी है . तो सोचिये मत इससे पहले कि आपके पिताजी इसे पढ़कर ये कहें कि ये जैनरेशन एैसा कुछ कभी नहीं कर सकती आप उन्हें बता दीजिये कि आप एैसा ही करेंगे क्योंकि आप उनके बच्चे हैं , आप उन्हें बहुत प्यार करते हैं और आपको उनमें रब दिखता है .
                              - शालिनी श्रीवास्तव