लोक चक्षु
Tuesday, 3 November 2015
आज भी अजान और मंदिर की घंटी संगीत बना देती है,
आज भी रमजान में राम और दीवाली में अली है ।।
फिर कौन कहता है कि यहां नफ़रतों क़ा आलम है?
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