आँखों की नमी ,
खामोशियों की आहटें ,
उलझे रिश्तों की उलझनें ,
बयां है अनकही फ़िक्र का ।
अधूरे लफ्जों की बेचैनियां ,
अधूरी सांसो की वो कड़ियाँ,
बयां है अधूरे बंधनों का ।
दूरियाँ राहों की ,
मजबूरियां अल्फाजों की ,
फ़िक्र हमारी कुछ जो है ,
बयां है अधूरी चाहतों का ।