हो गयी हैं शाम यादों की तुम्हारी ,
ढल रहा है वो ख्वाबों का सूरज ।
जा रही है बसेरों में अपने ,
लौट के उम्मीद की वो एक चिड़िया ।
बदल गया है रंग अब ,
चाहत के आसमां का ।
खामोशियों की आगोश में ,
लिपटी हुई है तेरी चंचल सी गुड़िया ।।
ढल रहा है वो ख्वाबों का सूरज ।
जा रही है बसेरों में अपने ,
लौट के उम्मीद की वो एक चिड़िया ।
बदल गया है रंग अब ,
चाहत के आसमां का ।
खामोशियों की आगोश में ,
लिपटी हुई है तेरी चंचल सी गुड़िया ।।