अल्फाज खामोश हो जाते हैं , अश्क आँखों में जम जाते हैं। कभी कभी वक्त जैसे थम जाता है और रास्ते चलते चलते रुक जाते हैं। । मुसाफिर गुजर जाते हैं , यादें छोड़ जाते हैँ । ।
Thursday, 18 December 2014
पेशावर की निंदनीय घटना पर प्रतिक्रिया स्वरूप ये पंक्तियाँ