Thursday, 25 December 2014

अल्फाज खामोश हो जाते हैं ..

अल्फाज खामोश हो जाते हैं ,
अश्क आँखों में जम जाते हैं। 
कभी कभी वक्त जैसे थम जाता है 
और रास्ते चलते चलते रुक जाते हैं। । 
मुसाफिर गुजर जाते हैं  ,
यादें  छोड़  जाते  हैँ   । 


Thursday, 18 December 2014

पेशावर की निंदनीय घटना पर प्रतिक्रिया स्वरूप ये पंक्तियाँ 
    आज अपने ही लहू से सनी हैं अंगुलियाँ। 
    ये कुछ नही बस कांच के टुकड़े उठाने की सजा है !


Saturday, 6 December 2014

Its a Story ...

I will wait for you and you will wait for me .. and this wait will end with nothing .