लोग कहते हैं क़ि नारी जब अधिकार मांगेगी सम्मान खो देगी ।ये बात कड़वा सच है लेकिन इस सच पे पीछे है झूठी शान का अंहकार झूठे विश्वावाशों की पट्टी जो कुछ स्वार्थी मानसिकता वाले लोगों ने समाज की आँखों में बांध दी , जिससे कोई नारी ना अधिकार मांगे ना अधिकारों की लड़ाई लड़े और अगर कोई हिम्मत करे तो समाज जिसमें नारी पुरुष दोनों आते है वो उसके सम्मान की धज्जियां उडा सके ...उसे त्याग की महान चादर में छिपके सिसकियाँ लेने को मजबूर कर सके ।उसे अबला बना सके , उसे झूठी शान की बेड़ियों में जकड़ कर अपनी लालच और सेवार्थ उसका प्रयोग कर सके । रक्षा चन्द खुशियाँ और झूठी इज्जत देने के नाम से उसे कभी अधिकार ना मांगने की शर्त मनवा सकें ।। ये लेख पढ़के मुझे कोई दुखी लाचार मत समझियेगा बस अनुभव है ये मेरा और मुझे बेहतर तरीके से पता है की ये तस्वीर ये छवि बदलना कठिन है असम्भव नही । उसी राह पर चलेंगे हम आप अपनी सोच को थोडा विकसित करके इस राह में आ सकते हैँ । क्योंकि अब अधिकार नारी मांगेगी नहीं उसे पता है कि ये उसके अधिकार है और उसे उन्हें मांगने की आवश्यकता ही नहीं है।।
कभी नादान दुनिया की , आगोश में ले जाता है, कभी ख़्वाबों की चादरों में , छुप जाता है । कभी खुशियों की आहटों को , समेट लेता है , कभी ठोकरें लगती है जो, शीशे सा टूट जाता है ये दिल ही तो है मेरा, कभी शीशा कभी आवारा पंछी , कभी पत्थर कहलाता है।।