कभी नादान दुनिया की ,
आगोश में ले जाता है,
कभी ख़्वाबों की चादरों में ,
छुप जाता है ।
कभी खुशियों की आहटों को ,
समेट लेता है ,
कभी ठोकरें लगती है जो,
शीशे सा टूट जाता है
ये दिल ही तो है मेरा,
कभी शीशा कभी आवारा पंछी ,
कभी पत्थर कहलाता है।।
आगोश में ले जाता है,
कभी ख़्वाबों की चादरों में ,
छुप जाता है ।
कभी खुशियों की आहटों को ,
समेट लेता है ,
कभी ठोकरें लगती है जो,
शीशे सा टूट जाता है
ये दिल ही तो है मेरा,
कभी शीशा कभी आवारा पंछी ,
कभी पत्थर कहलाता है।।
No comments:
Post a Comment