Sunday, 31 July 2016

बारिश की बूँदें

बारिश की बूँदें यूँ, 
धरा को सजाती हैं ।
जैसे इक नयी दुल्हन
कभी खुद को सजाती है ।
कभी रूकती है शरमा कर ,
कभी वो मुस्कुराती है ।।

Wednesday, 27 July 2016

सावन आया

सजी मेंहदी हथेली पर ,
प्यार का त्योहार आया ।
मना जश्न हर ओर
कि देखो सावन आया ।
गगन में शोर करती हैं ,
उड़ती पतंगे ।
वो देखो भैया,
देने बहन को प्यार आया ।
बहुत मदहोश करती हैं 
बारिश की बूँदें ♡
मेरे पास भी देखो ,
किसी का तार आया ।
बहुत रोती है छुप करके 
बेचैन अंखियाँ,
बूँदों में यादें सावन बाँध लाया । 
बेटी झूलती है अंगना में झूला ,
बाबुल के घर की रोशनी समेट लाया ।
गाती झूमती है जैसे सारी ये दुनिया  ,
कजरी की मीठी ताल की ,
ये थाप लाया ।
मना जश्न हर ओर,
कि देखो सावन आया ।     
Picture Credit : Google  

Wednesday, 20 July 2016

क्यों जिंदा हूँ इस हाल में

तुम्हारे उसूलों के पत्थर ,
चुभ रहें हैं अब पांव में ।
टूट रहा घरौंदा ख्वाब का,
इस दुनिया के रिवाज से ।
पूछ रही है सांस ये , 
क्यों जिंदा हूँ इस हाल में ।
क्यों जिंदा हूँ इस हाल में ।
कब तक रहेगी ये गुलामी ,
इस दोहरी सोच के ,
नकाब में बाजार में ।
घुट रहा हर कोई है ,
उलझनों के दोहराव में ।
पूछ रही है सांस ये , 
क्यों जिंदा हूँ इस हाल में ।
क्यों जिंदा हूँ इस हाल में ।

Monday, 18 July 2016

कम लोग वाकिफ हैं हमसे

ख्वाब लेते हैं सिसकी,
निगाह आंसू बहाती है ।
है बेरहम मुकद्दर और ,
दुनिया आजमाती है ।
बड़े तख्त हैं हासिल  
निगाह ए जहां में  ,
कम लोग वाकिफ हैं हमसे ,
हमें फकीरी भाती है ।
हैं बहुत मशगूल ,
मशहूरियत में हम
ये सब कहने की बातें हैं ।
हमें बेनाम दुनिया की 
बहुत याद आती है ।
बना बैठी है दुनिया 
फलक का सितारा हमको, 
हमको हमारी मिट्टी की 
बहुत याद आती है ।।

Wednesday, 6 July 2016

ख्याल

तुम पूछते हो वजह मेरी चाहत की ,
तो एहसास शोर करते है ,
लफ़ज़ खामोश होते है ।

-शालिनी

ईद मुबारक

ईद मुबारक

इस मुबारक मौके पर खयालात के कुछ सुर अर्ज हैं

नीले आसमान में वो चाँद नजर आया है ,
मनाओ जश्न रोजेदारों अल्लाह का पैगाम आया है ।
अमन का पैगाम मोहब्बत की सदायें लाया है ,
जागो दुनिया वालों वो हमें जगाने आया है ।
मिटा दो नफरतों की बेड़ियाँ देखो ,
आसमान एक है वक्त एक है ,
 मना जश्न  जिसे देखकर वो चाँद  एक है ।
है इनायत जिसकी दर - ब - दर ,
वो खुदा एक है ,
नूर ए फिज़ा एक है ।