सजी मेंहदी हथेली पर , प्यार का त्योहार आया । मना जश्न हर ओर कि देखो सावन आया । गगन में शोर करती हैं , उड़ती पतंगे । वो देखो भैया, देने बहन को प्यार आया । बहुत मदहोश करती हैं बारिश की बूँदें ♡ मेरे पास भी देखो , किसी का तार आया । बहुत रोती है छुप करके बेचैन अंखियाँ, बूँदों में यादें सावन बाँध लाया । बेटी झूलती है अंगना में झूला , बाबुल के घर की रोशनी समेट लाया । गाती झूमती है जैसे सारी ये दुनिया , कजरी की मीठी ताल की , ये थाप लाया । मना जश्न हर ओर, कि देखो सावन आया । Picture Credit : Google
तुम्हारे उसूलों के पत्थर , चुभ रहें हैं अब पांव में । टूट रहा घरौंदा ख्वाब का, इस दुनिया के रिवाज से । पूछ रही है सांस ये , क्यों जिंदा हूँ इस हाल में । क्यों जिंदा हूँ इस हाल में । कब तक रहेगी ये गुलामी , इस दोहरी सोच के , नकाब में बाजार में । घुट रहा हर कोई है , उलझनों के दोहराव में । पूछ रही है सांस ये , क्यों जिंदा हूँ इस हाल में । क्यों जिंदा हूँ इस हाल में ।
ख्वाब लेते हैं सिसकी, निगाह आंसू बहाती है । है बेरहम मुकद्दर और , दुनिया आजमाती है । बड़े तख्त हैं हासिल निगाह ए जहां में , कम लोग वाकिफ हैं हमसे , हमें फकीरी भाती है । हैं बहुत मशगूल , मशहूरियत में हम ये सब कहने की बातें हैं । हमें बेनाम दुनिया की बहुत याद आती है । बना बैठी है दुनिया फलक का सितारा हमको, हमको हमारी मिट्टी की बहुत याद आती है ।।
नीले आसमान में वो चाँद नजर आया है , मनाओ जश्न रोजेदारों अल्लाह का पैगाम आया है । अमन का पैगाम मोहब्बत की सदायें लाया है , जागो दुनिया वालों वो हमें जगाने आया है । मिटा दो नफरतों की बेड़ियाँ देखो , आसमान एक है वक्त एक है , मना जश्न जिसे देखकर वो चाँद एक है । है इनायत जिसकी दर - ब - दर , वो खुदा एक है , नूर ए फिज़ा एक है ।