Wednesday, 6 July 2016

ईद मुबारक

ईद मुबारक

इस मुबारक मौके पर खयालात के कुछ सुर अर्ज हैं

नीले आसमान में वो चाँद नजर आया है ,
मनाओ जश्न रोजेदारों अल्लाह का पैगाम आया है ।
अमन का पैगाम मोहब्बत की सदायें लाया है ,
जागो दुनिया वालों वो हमें जगाने आया है ।
मिटा दो नफरतों की बेड़ियाँ देखो ,
आसमान एक है वक्त एक है ,
 मना जश्न  जिसे देखकर वो चाँद  एक है ।
है इनायत जिसकी दर - ब - दर ,
वो खुदा एक है ,
नूर ए फिज़ा एक है ।




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