अग्निपथ पर ठहरा हुआ हो वक्त
और मुस्कुरा दो तुम ....
हो रास्ता सुनसान सा
और शोर हो तुझ में
अंधकार हो घनघोर सा
और खुद को बुझा दो तुम
जलने की आरजू हो तुझमें
और अक्स को दफना दो तुम ।
जब पूछता हो हर मंजर
है क्या पहचान तेरी
अंधकार से संघर्ष में
खुद को जला दो तुम ।।
और मुस्कुरा दो तुम ....
हो रास्ता सुनसान सा
और शोर हो तुझ में
अंधकार हो घनघोर सा
और खुद को बुझा दो तुम
जलने की आरजू हो तुझमें
और अक्स को दफना दो तुम ।
जब पूछता हो हर मंजर
है क्या पहचान तेरी
अंधकार से संघर्ष में
खुद को जला दो तुम ।।
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