Thursday, 15 September 2016

Do Lafjon ki kahani

Ise lafjon me yun hi kaise kah sakoge tum 
Ye ahsaas hai , jajbaat hai ,
kisse hai sadiyon ke .
Kabhi kagaj me simate lafj hai ..
Kabhi niche hai takiyon ke ..
Ye un kagajon ke fate hue se hai tukade ..
Jo pure pure se mujhme tujh me baki hai ..
Inhi do lafjon me tum kitna sametoge
Ye sirf teri hi ni pagal..
meri bhi kahani hai .. .


Saturday, 27 August 2016

Kyu koi jashn ho

Hai shama viiran sa ,
Hai jashn ki sajavatein ...
Hai udas har manjar mera ..
Or khushi ki daavtein 
Gair sab mashgool se hai 
Jashn ke shor me ..
Dil me ik shor sa hai 
Jal rhe kuch khwaab se ..
Jashn ka mahol kyu ab 
Kyu koi ho daavateein 
Chal lagaye yaro ki mahfil 
JHaan dard ki ho adaalatein
Kyu koi jashn ho 
Kyun koi ho daavatein ..

Sunday, 31 July 2016

बारिश की बूँदें

बारिश की बूँदें यूँ, 
धरा को सजाती हैं ।
जैसे इक नयी दुल्हन
कभी खुद को सजाती है ।
कभी रूकती है शरमा कर ,
कभी वो मुस्कुराती है ।।

Wednesday, 27 July 2016

सावन आया

सजी मेंहदी हथेली पर ,
प्यार का त्योहार आया ।
मना जश्न हर ओर
कि देखो सावन आया ।
गगन में शोर करती हैं ,
उड़ती पतंगे ।
वो देखो भैया,
देने बहन को प्यार आया ।
बहुत मदहोश करती हैं 
बारिश की बूँदें ♡
मेरे पास भी देखो ,
किसी का तार आया ।
बहुत रोती है छुप करके 
बेचैन अंखियाँ,
बूँदों में यादें सावन बाँध लाया । 
बेटी झूलती है अंगना में झूला ,
बाबुल के घर की रोशनी समेट लाया ।
गाती झूमती है जैसे सारी ये दुनिया  ,
कजरी की मीठी ताल की ,
ये थाप लाया ।
मना जश्न हर ओर,
कि देखो सावन आया ।     
Picture Credit : Google  

Wednesday, 20 July 2016

क्यों जिंदा हूँ इस हाल में

तुम्हारे उसूलों के पत्थर ,
चुभ रहें हैं अब पांव में ।
टूट रहा घरौंदा ख्वाब का,
इस दुनिया के रिवाज से ।
पूछ रही है सांस ये , 
क्यों जिंदा हूँ इस हाल में ।
क्यों जिंदा हूँ इस हाल में ।
कब तक रहेगी ये गुलामी ,
इस दोहरी सोच के ,
नकाब में बाजार में ।
घुट रहा हर कोई है ,
उलझनों के दोहराव में ।
पूछ रही है सांस ये , 
क्यों जिंदा हूँ इस हाल में ।
क्यों जिंदा हूँ इस हाल में ।

Monday, 18 July 2016

कम लोग वाकिफ हैं हमसे

ख्वाब लेते हैं सिसकी,
निगाह आंसू बहाती है ।
है बेरहम मुकद्दर और ,
दुनिया आजमाती है ।
बड़े तख्त हैं हासिल  
निगाह ए जहां में  ,
कम लोग वाकिफ हैं हमसे ,
हमें फकीरी भाती है ।
हैं बहुत मशगूल ,
मशहूरियत में हम
ये सब कहने की बातें हैं ।
हमें बेनाम दुनिया की 
बहुत याद आती है ।
बना बैठी है दुनिया 
फलक का सितारा हमको, 
हमको हमारी मिट्टी की 
बहुत याद आती है ।।

Wednesday, 6 July 2016

ख्याल

तुम पूछते हो वजह मेरी चाहत की ,
तो एहसास शोर करते है ,
लफ़ज़ खामोश होते है ।

-शालिनी

ईद मुबारक

ईद मुबारक

इस मुबारक मौके पर खयालात के कुछ सुर अर्ज हैं

नीले आसमान में वो चाँद नजर आया है ,
मनाओ जश्न रोजेदारों अल्लाह का पैगाम आया है ।
अमन का पैगाम मोहब्बत की सदायें लाया है ,
जागो दुनिया वालों वो हमें जगाने आया है ।
मिटा दो नफरतों की बेड़ियाँ देखो ,
आसमान एक है वक्त एक है ,
 मना जश्न  जिसे देखकर वो चाँद  एक है ।
है इनायत जिसकी दर - ब - दर ,
वो खुदा एक है ,
नूर ए फिज़ा एक है ।




Saturday, 30 April 2016

श्रमिक दिवस पर विशेष

पसीने से भीगा रहता है तन ..रोता बिलखता रहता है उस माँ का बच्चा जो ईटों का बोझ सर पर उठाती है । हर रोज जर्जर होता है उसका शरीर जो जर्जर इमारतों को दिन रात दुरुस्त करने में लगा रहता है ।किताबों को पकड़ने के लिए बने नाजुक हाँथ ईटों के भारी बोझ को उठाने में जैसे सक्षम से हो जाते हैं । ये दास्तां है कामगारों की ..जी वही कामगार जिनकी एक बड़ी संख्या है इस दुनिया में जिन्होंने अपने हांथों से बनाया है भूत भविष्य और वर्तमान के चेहरे को । जो निर्माता होता है ..नींव की ईट बन जाता है ..जो आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं ।
मई दिवस को हर साल मनाने का प्रस्ताव सन् 1889 में पेरिस में हुई एक मीटिंग में रेमण्ड लेविगन ने रखा था सर्वप्रथम उन्होंने ही शिकागो में हुए जनांदोलन को प्रत्येक वर्ष अंतराष्ट्रीय स्तर पर मनाये जाने की आवश्यकता को महसूस किया था । उसके बाद सन् 1891 में द्वितीय अंतराष्ट्रीय कांग्रेस में इसे औपचारिक पहचान मिली ।
सन् 1904 में एम्स्टर्डम में इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांफ्रेंस आयोजित की गयी जिसमे  सभी देशों के समाजवादी प्रजातात्रिक संस्थाओं , मजदूर संगठनों को  आमन्त्रित किया गया । इस कांफ्रेंस काम के  घण्टों को क़ानूनी तौर पर 8 घण्टे करने का प्रावधान किया गया और मई दिवस के दिन कार्य स्थगन को सम्मिलित देशों में अनिवार्य किया गया।  आज विश्व के 80 देश इस दिन को मनाते हैं । भारत में सर्वप्रथम सन् 1923 में चेन्नई से इस दिवस को मनाने की शुरुआत हुई और आज पूरे भारत में इस दिवस को मनाया जाता है ।
  श्रमिक श्रम करने वाला हर व्यक्ति है । हर श्रमिक को अपने कर्तव्यों को निभाते हुए अधिकारों के प्रति जागरूक होना होगा । उठ खड़े होना अपने शोषण के खिलाफ जंग में ..वो हाँथ जिनमे ताकत है एक इमारत को खड़ा कर देने कि वो हाँथ किसी से अपने अधिकारों की भीख क्यों मांगेगे भला ।

उठो हिला दो तुम नींव को शोषण की ,
तुम श्रमिक हो , निर्माता हो ,
तुम्ही भूत भविष्य के निर्माता हो ।
तेरे हांथों की ताकत से ,
नई सुबह रस्ता पाती है ..
तुम याचक नहीं तुम सैनिक बनो ,
अधिकारों के संरक्षक बनो ।।

#शालिनी

Sunday, 14 February 2016

On Special occasion of Valentines day दास्तां

आपकी वफ़ा की खुशबू से महकते हैं हम ,
मुस्कुराते है कभी ,तो कभी सिसकते हैं हम !
अल्फाज क्या होंगे बयां करते वफ़ा को हम ,
लफ्ज कम पड़ेंगे तब,जब ये दास्ताँ लिखेंगे हम !!

Saturday, 30 January 2016

शाम

हो गयी हैं शाम यादों की तुम्हारी ,
ढल रहा है वो ख्वाबों का सूरज ।
जा रही है बसेरों में अपने ,
लौट के उम्मीद की वो एक चिड़िया ।
बदल गया है रंग अब ,
चाहत के आसमां का ।
खामोशियों की आगोश में ,
लिपटी हुई है तेरी चंचल सी गुड़िया ।।