जिद्दी सी यादों के दलीचे पर ,
खामोश बैठे रहते हैं ।
कभी हवा के झोंको पर हम,
तेरी महक को ढूंढा करते हैं ,
हम तुम्हे याद कहां करते हैं ...।
हर पल हर आहट पर ,
हम तेरी आहट को तरसा करते हैं ।
चौकते हैं , सिसकते हैं ,
कभी खुद पर मुस्कुराया करते हैं ।
हम तुम्हे याद कहां करते हैं ।
तुम बार बार पूछते हो
मेरी याद नहीं आती ?
हम हज़ार बार कहते हैं ,
मशरूफियत नहीं जाती ।
कभी मशरूफियत में भी ,
मुझे छेड़ा करती हैं
तेरी ये यादें बेवजह ही आती हैं ।
मैं नसीब की चादर में तुझे ढूंढ़ती ही रहती हूँ
तुम्हारी हर वफ़ा मुझको हदों के पार मिलती है ।
कभी उसूलों से पार रास्ते में
मुझे आकर के तुम मिलना
फिर पूछ मत लेना
क्या मेरी याद आती है ?
खामोश बैठे रहते हैं ।
कभी हवा के झोंको पर हम,
तेरी महक को ढूंढा करते हैं ,
हम तुम्हे याद कहां करते हैं ...।
हर पल हर आहट पर ,
हम तेरी आहट को तरसा करते हैं ।
चौकते हैं , सिसकते हैं ,
कभी खुद पर मुस्कुराया करते हैं ।
हम तुम्हे याद कहां करते हैं ।
तुम बार बार पूछते हो
मेरी याद नहीं आती ?
हम हज़ार बार कहते हैं ,
मशरूफियत नहीं जाती ।
कभी मशरूफियत में भी ,
मुझे छेड़ा करती हैं
तेरी ये यादें बेवजह ही आती हैं ।
मैं नसीब की चादर में तुझे ढूंढ़ती ही रहती हूँ
तुम्हारी हर वफ़ा मुझको हदों के पार मिलती है ।
कभी उसूलों से पार रास्ते में
मुझे आकर के तुम मिलना
फिर पूछ मत लेना
क्या मेरी याद आती है ?
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