तेरी हर जुबानी पर शायरी लिख दूँ मैं,
तू रूह में यूँ बस जा कि तुम्हे मैं लिख दूँ मैं ।
कभी सांसों में यूँ ठहर कि
सदियों में न बीते ऐसा पल लिख दूँ मैं।
ये आहटे ये चाहते ये तन्हापन की उलझनें
तू मुझे कुछ यूँ उलझा दे खुद में
कि सुलझन लिख दूँ मैं ।
कभी दिल के दरिया में बरसात बन कर मुझसे मिल
कभी ये दिल बारिश बन जाये तुझे प्यास लिख दूँ मैं ।
मेरे वजूद की हर हद बिखर जाये कहीं तुझमें
तू अपनी हद में मुझको पनाह देगी लिख दूँ मैं ।
मेरे सब्र की हर सांस टूट जाये
तू आके मिल यूँ मुझसे की थोड़ा जी लूँ फिर से मैं ।
तुझे वो आस लिख दूँ मैं ।
मेरे अश्कों की साँस के टूटने से पहले आ
कभी खत्म नहीं हो जो तुझे वो इंतज़ार लिख दूँ मैं।
मेरा वजूद आइने में मुझे झूठा नज़र आये
तेरी आँखों के सीसे में मेरा ये जिस्म दिख जाये
जो मेरी रूह तक पहुंचे तुझे वो जज़्बात लिख दूँ मैं ।
तू मेरे करीब आ इतना तेरा हर लफ्ज पढ़ लूँ मैं
जिस्म से रूह तक छू ले तुझे ग़ज़ल लिख दूँ मैं ।
तू रूह में यूँ बस जा कि तुम्हे मैं लिख दूँ मैं ।
कभी सांसों में यूँ ठहर कि
सदियों में न बीते ऐसा पल लिख दूँ मैं।
ये आहटे ये चाहते ये तन्हापन की उलझनें
तू मुझे कुछ यूँ उलझा दे खुद में
कि सुलझन लिख दूँ मैं ।
कभी दिल के दरिया में बरसात बन कर मुझसे मिल
कभी ये दिल बारिश बन जाये तुझे प्यास लिख दूँ मैं ।
मेरे वजूद की हर हद बिखर जाये कहीं तुझमें
तू अपनी हद में मुझको पनाह देगी लिख दूँ मैं ।
मेरे सब्र की हर सांस टूट जाये
तू आके मिल यूँ मुझसे की थोड़ा जी लूँ फिर से मैं ।
तुझे वो आस लिख दूँ मैं ।
मेरे अश्कों की साँस के टूटने से पहले आ
कभी खत्म नहीं हो जो तुझे वो इंतज़ार लिख दूँ मैं।
मेरा वजूद आइने में मुझे झूठा नज़र आये
तेरी आँखों के सीसे में मेरा ये जिस्म दिख जाये
जो मेरी रूह तक पहुंचे तुझे वो जज़्बात लिख दूँ मैं ।
तू मेरे करीब आ इतना तेरा हर लफ्ज पढ़ लूँ मैं
जिस्म से रूह तक छू ले तुझे ग़ज़ल लिख दूँ मैं ।
:)
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